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विज्ञान के महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर -1 Important Question Of Science

वायरस एवं एंटी वायरस

वायरस एवं एंटी वायरस  के बारे में कुछ जानकारी 

ANTIVIRUS

यह एक यूटिलिटी सॉफ्टवेयर है जो की कंप्यूटर को सुरक्षित रखता है अथवा वायरस से बचाता है ,
यह एक सॉफ्टवेयर  है जो नुकसानदायक डाटा को स्कैन करके उससे बचाता है या हटा देता है .
इसके द्वारा हम सिस्टम को स्कैन करके वायरस को हटा देता है .

कुछ महत्वपूर्ण एंटी वायरस के नाम 

  • NORTAN
  • MCAFFE
  • QUICKHEAL
  • AVST
  • NP-AV (NET PROTECTOR )
  • TREND MICRO
  • AVG
  • BIT DEFENDER
  • PANDA
  • ESET

MALWARE PROGRAMME

यह एक ऐसा सॉफ्टवेयर है जो कंप्यूटर को नुकसान पहुचाता है .
जैसे - वायरस , वर्मास , ट्रोजन , स्पयवारे ,स्पम आदि .

VIRUS

  • यह एक कंप्यूटर प्रोग्राम है |
  • यह एक तरह का सॉफ्टवेयर प्रोग्राम है जो स्वत : लोड हो जाता है |
  • वायरस के कारन सिस्टम धीमी हो जाता है |
  • ब्रेन नामक वायरस प्रथम बूथ सेक्टर वायरस है |
  • वायरस के बारे में सर्वप्रथम जानकारी 1972 में डेविड मेराल्ड्स ने दिया था |
  • यह कंप्यूटर के डाटा को नुकसान पहुचता है |
  • इससे बचने के लिए एंटी वायरस आवश्यक है |

वायरस फैलने के कारण 

CD, डीवीडी, ईमेल , नेटवर्क ,हार्ड डिस्क आदि .

कंप्यूटर वायरस के प्रकार 

  • DIRECT ACTION वायरस 
  • OVER RIGHT वायरस 
  • BOOT SECTOR वायरस 
  • MACRO वायरस 
  • FILE SYSTEM वायरस 
  • WEB SCRIPTING वायरस 
  • MULTIPARTIVTE वायरस 

कुछ महत्वपूर्ण वायरस के नाम 

  • हैप्पी बर्थडे जोशी (भारत में दिखाई देने वाला प्रथम वायरस )
  • सी - ब्रेन (प्रथम I.B.M.P.C वायरस है |
  • चंगु - मंगू 
  • वन्दे मातरम 
  • वान हाफ 
  • क्रिपेर 
  • माइकल एंजेलो
  • आई लव यू 
  • कोड रेड 

महत्वपूर्ण तथ्य 

  • वायरस का पूरा नाम VITAL INFORMATION UNDER SIEGE है .
  • पहला बूट सेक्टर वायरस ब्रेन था जिसकी पहचान 1956 में  हुई .
  • भारत में सर्प्रथम दिखाई देने वाला वायरस हैप्पी बर्थडे जोशी है .
  • 1260 कंप्यूटर वायरस पालीमर्फिक वायरस का एक उदहारण है .

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अर्थालंकार एवं अर्थालंकार के प्रकार

अर्थालंकार 

उपमा अलंकार
जहाँ गुण , धर्म या क्रिया के आधार पर उपमेय की तुलना उपमान से की जाती है  वहा उपमा  अलंकार होता है .
उदहारण-सागर-सा गंभीर हृदय हो,गिरी- सा ऊँचा हो जिसका मन।
इसमें सागर तथा गिरी उपमान, मन और हृदय उपमेय सा वाचक, गंभीर एवं ऊँचा साधारण धर्म है।
रूपक अलंकार 

जिस जगह उपमेय पर उपमान का आरोप किया जाए, उस अलंकार को रूपक अलंकार कहा जाता है, यानी उपमेय और उपमान में कोई अन्तर न दिखाई पड़े.
 जैसे -अम्बर-पनघट में डुबो रही तारा-घट ऊषा-नागरी यहाँ  पर  अम्बर रूपी  पनघट।तारा रूपी घट।ऊषा रूपी नागरी है । उत्प्रेक्षा अलंकार उपमेय में उपमान की कल्पना या सम्भावना होने पर उत्प्रेक्षा अलंकार कहलाता  है. जैसे -सखि सोहत गोपाल के, उर गुंजन की मालबाहर सोहत मनु पिये, दावानल की ज्वाल।।

 अतिशयोक्ति अलंकार यहाँ पर गुंजन की माला उपमेय में दावानल की ज्वाल उपमान के संभावना होने से उत्प्रेक्षा अलंकार है। जिस स्थान पर लोक-सीमा का अतिक्रमण करके किसी विषय का वर्णन होता है। वहाँ पर अतिशयोक्ति अलंकार होता है।

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संज्ञा के प्रकार एवं उसके भेद

जिस शब्द से किसी प्राणी, वस्तु, स्थान, जाति, भाव आदि के 'नाम' का बोध होता है उसे संज्ञा कहते हैं
                                                                   अथवा
किसी जाति, द्रव्य, गुण, भाव, व्यक्ति, स्थान और क्रिया आदि के नाम को संज्ञा कहते हैं।
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संज्ञा के पांच भेद होते हैं : व्यक्तिवाचक संज्ञा जातिवाचक संज्ञा भाववाचक संज्ञा समूहवाचक संज्ञाद्रव्यवाचक संज्ञा  www.gkcurrent3.blogspot.com
व्यक्तिवाचक संज्ञा
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