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विज्ञान के महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर -1 Important Question Of Science

वित्त आयोग ,राष्ट्रीय विकाश परिषद्

वित्त आयोग ,राष्ट्रीय विकाश परिषद्
वित्‍त आयोग का गठन राष्‍ट्रपति करते हैं. आयोग पांच साल की अवधि के लिए सिफारिशें देता है और इसका मुख्‍य काम केंद्र-राज्‍यों के बीच करों की हिस्‍सेदारी तय करना है.
वित्त आयोग में राष्ट्रपति द्वारा एक अध्यक्ष और चार अन्य सदस्य नियुक्त किये जाते हैं

 प्रावधान भारतीय संविधान के अनुच्छेद 280 में है, जिसके अनुसार देश का राष्ट्रपति प्रत्येक वर्ष के बाद और यदि आवश्यकता पड़ी तो उससे पहले भी केंद्रीय वित्त आयोग का गठन कर सकता है।



·        भारतीय संविधान के अनुच्छेद 280 (3) के अंतर्गत केंद्रीय वित्त आयोग निम्नलिखित विषयों के संबंध में राष्ट्रपति को अपनी सिफ़ारिशें प्रस्तुत करेगा-
·        केंद्र एवं राज्य सरकारों के मध्य कुल निवल प्राप्तियों (कर + प्रशुल्क) के बंटवारे के संबंध में सिफ़ारिश।
·        भारतीय संचित निधि[ में से राज्य सरकारों को दी जाने वाली सहायता एवं अनुदान के संबंध में सिफ़ारिशें।
·        सुदृढ़ वित्त के हित में अन्य विषय जिस पर राष्ट्रपति केंद्रीय वित्त आयोग की सिफ़ारिशें जानना चाहता है, पर अपनी संस्तुति देगा
अब तक के वित्त आयोग 
वित्त आयोग
अध्यक्ष
नियुक्ति वर्ष
अवधि
पहला
के.सी. नियोगी
1951
1952-57
दूसरा
के. संथानम
1956
1957-62
तीसरा
ए.के. चन्दा
1960
1962-66
चौथा
पी.वी. राजमन्नार
1964
1966-69
पाचवाँ
महावीर त्यागी
1968
1969-74
छठा
ब्रम्हानंद रेड्डी
1972
1974-79
सातवाँ
जे.एम. शैलट
1977
1979-84
आठवाँ
वाई.बी. चव्हाण
1983
1984-88
नवाँ
एन.के.पी. साल्वे
1987
1988-95
दसवाँ
के.सी. पंत
1992
1995-2000
ग्यारहवाँ
प्रो.ए.एम. खुसरो
1998
2000-2005
बारहवाँ
सी. रंगराजन
2003
2005-2010
तेरहवाँ
 विजय एल. केलकर
2007
 2010-2015
चौदाहवाँ
वाई.वी. रेड्डी
2013
2015-2020
 राज्य वित्त आयोग का गठन भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243 (1 ) की द्वारा किया जाता ह


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राष्टीय विकास  परिषद् 

·                      योजना के निर्माण में राज्यों की भागीदारी होनी चाहिए, इस विचार को स्वीकार करते हुए सरकार के एक प्रस्ताव द्वारा 6 अगस्त, 1952 ई० को राष्ट्रीय विकास परिषद का गठन हुआ.
·                      प्रधानमंत्री, परिषद का अध्यक्ष होता है. योजना आयोग का सचिव भी इसका सचिव होता है 


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अर्थालंकार एवं अर्थालंकार के प्रकार

अर्थालंकार 

उपमा अलंकार
जहाँ गुण , धर्म या क्रिया के आधार पर उपमेय की तुलना उपमान से की जाती है  वहा उपमा  अलंकार होता है .
उदहारण-सागर-सा गंभीर हृदय हो,गिरी- सा ऊँचा हो जिसका मन।
इसमें सागर तथा गिरी उपमान, मन और हृदय उपमेय सा वाचक, गंभीर एवं ऊँचा साधारण धर्म है।
रूपक अलंकार 

जिस जगह उपमेय पर उपमान का आरोप किया जाए, उस अलंकार को रूपक अलंकार कहा जाता है, यानी उपमेय और उपमान में कोई अन्तर न दिखाई पड़े.
 जैसे -अम्बर-पनघट में डुबो रही तारा-घट ऊषा-नागरी यहाँ  पर  अम्बर रूपी  पनघट।तारा रूपी घट।ऊषा रूपी नागरी है । उत्प्रेक्षा अलंकार उपमेय में उपमान की कल्पना या सम्भावना होने पर उत्प्रेक्षा अलंकार कहलाता  है. जैसे -सखि सोहत गोपाल के, उर गुंजन की मालबाहर सोहत मनु पिये, दावानल की ज्वाल।।

 अतिशयोक्ति अलंकार यहाँ पर गुंजन की माला उपमेय में दावानल की ज्वाल उपमान के संभावना होने से उत्प्रेक्षा अलंकार है। जिस स्थान पर लोक-सीमा का अतिक्रमण करके किसी विषय का वर्णन होता है। वहाँ पर अतिशयोक्ति अलंकार होता है।

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