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विज्ञान के महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर -1 Important Question Of Science

संघ और उसका राज्य क्षेत्र (भाग 1 )



संघ और उसका राज्य क्षेत्र

भारत राज्यों का संघ है ,जिसमे जिसमे 29 राज्य और 7 केंद्र शासित प्रदेश है .
अनुच्छेद -1 :1. भारत अर्थात इंडिया राज्यों का संघ होगा .
2.राज्य और उनके राज्य क्षेत्र होंगे जो पहली अनुसूची में विनिर्दिष्ट है.
3.भारत के राज्य क्षेत्र में अर्जित किये गये अन्य राज्य क्षेत्र समाविष्ट होंगे .

अनुच्छेद -2 :भारत की संसद को विधि द्वारा ऐसे निबंधनो और शर्तो पर जो वह ठीक समझे संघ में नये राज्य का प्रवेश या उनकी स्थापना की शक्ति प्रदान की गयी .

अनुच्छेद -3:नए राज्यों का निर्माण और वर्तमान राज्यों के क्षेत्रों,सीमाओं या नामों में परिवर्तन संसद विधि द्वारा क्र सकती है .

नये राज्यों का गठन वर्ष
राज्य
गठन वर्ष
आँध्रप्रदेश
महाराष्ट्र
गुजरात
नागालैंड
हरियाणा
हिमाचल प्रदेश
मेघालय
मणिपुर
त्रिपुरा
सिक्किम
मिजोरम
अरूणाचल प्रदेश  
गोवा (25वा )
छत्तीसगढ़(26 वा )
उत्तराखंड (27 वा )
झारखण्ड (28 वा )
तेलंगाना (29 वा )
1अक्टूबर 1953
1 मई 1960
1 मई 1960
1 दिसम्बर 1963
1 नवम्बर 1966
25 जनवरी 1971
21 जनवरी 1972
21 जनवरी 1972
21 जनवरी 1972
26 अप्रैल 1975
20 फरवरी 1987
20 फरवरी 1987
30 मई 1987
1 नवम्बर 2000
9 नवम्बर 2000
15 नवम्बर 2000
2 जून 2014

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अर्थालंकार एवं अर्थालंकार के प्रकार

अर्थालंकार 

उपमा अलंकार
जहाँ गुण , धर्म या क्रिया के आधार पर उपमेय की तुलना उपमान से की जाती है  वहा उपमा  अलंकार होता है .
उदहारण-सागर-सा गंभीर हृदय हो,गिरी- सा ऊँचा हो जिसका मन।
इसमें सागर तथा गिरी उपमान, मन और हृदय उपमेय सा वाचक, गंभीर एवं ऊँचा साधारण धर्म है।
रूपक अलंकार 

जिस जगह उपमेय पर उपमान का आरोप किया जाए, उस अलंकार को रूपक अलंकार कहा जाता है, यानी उपमेय और उपमान में कोई अन्तर न दिखाई पड़े.
 जैसे -अम्बर-पनघट में डुबो रही तारा-घट ऊषा-नागरी यहाँ  पर  अम्बर रूपी  पनघट।तारा रूपी घट।ऊषा रूपी नागरी है । उत्प्रेक्षा अलंकार उपमेय में उपमान की कल्पना या सम्भावना होने पर उत्प्रेक्षा अलंकार कहलाता  है. जैसे -सखि सोहत गोपाल के, उर गुंजन की मालबाहर सोहत मनु पिये, दावानल की ज्वाल।।

 अतिशयोक्ति अलंकार यहाँ पर गुंजन की माला उपमेय में दावानल की ज्वाल उपमान के संभावना होने से उत्प्रेक्षा अलंकार है। जिस स्थान पर लोक-सीमा का अतिक्रमण करके किसी विषय का वर्णन होता है। वहाँ पर अतिशयोक्ति अलंकार होता है।

जैसे -
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यहाँ पर हनुमान की पूँछ…

संज्ञा के प्रकार एवं उसके भेद

जिस शब्द से किसी प्राणी, वस्तु, स्थान, जाति, भाव आदि के 'नाम' का बोध होता है उसे संज्ञा कहते हैं
                                                                   अथवा
किसी जाति, द्रव्य, गुण, भाव, व्यक्ति, स्थान और क्रिया आदि के नाम को संज्ञा कहते हैं।
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संज्ञा के पांच भेद होते हैं : व्यक्तिवाचक संज्ञा जातिवाचक संज्ञा भाववाचक संज्ञा समूहवाचक संज्ञाद्रव्यवाचक संज्ञा  www.gkcurrent3.blogspot.com
व्यक्तिवाचक संज्ञा
जिस शब्द से किसी एक ही वस्तु या व्यक्ति का बोध हो, उसे व्यक्तिवाचक संज्ञा कहते हैं |
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जातिवाचक संज्ञा
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