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विज्ञान के महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर -1 Important Question Of Science

शब्दालंकार एवं शब्दालंकार के प्रकार

शब्दालंकार 

अनुप्रास अलंकार
वर्णों की आवृत्ति को अनुप्रास कहते है। आवृत्ति का अर्थ किसी वर्ण का एक से अधिक बार आना है,
'अनु' का अर्थ है :- बार-बार तथा 'प्रास' का अर्थ है -वर्ण। जहाँ स्वर की समानता के बिना भी वर्णों की बार -बार आवृत्ति होती है ,वहाँ अनुप्रास अलंकार होता है.
उदाहरण- चारू चन्द्र की चंचल किरने, खेल रही थी जल थल में .

इसमें च वर्ण की आवृत्ति बार बार हुई है .

यमक अलंकार
जिस जगह एक ही शब्द  एक से अधिक बार प्रयुक्त हो, लेकिन उस शब्द का अर्थ हर बार भिन्न हो, वहाँ यमक अलंकार होता है.

उदहारण-कनक कनक ते सौगुनी, मादकता अधिकाय.वा खाये बौराय नर, वा पाये बौराय.
यहाँ कनक शब्द की दो बार आवृत्ति हुई है जिसमे एक कनक का अर्थ है- धतूरा और दूसरे का अर्थ स्वर्ण है.

श्लेष अलंकार 
जिन शब्दों के एक से अधिक अर्थ निलकते हो, वहाँ पर श्लेष अलंकार होता है, श्लेष का अर्थ होता है - चिपका हुआ .
पानी गये न उबरे ,मोती मानुष चुन .
यह पानी के तीन अर्थ है -मोती के साथ कान्ति,मनुष्य के साथ इज्जत और चुने के साथ जल .


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अर्थालंकार एवं अर्थालंकार के प्रकार

अर्थालंकार 

उपमा अलंकार
जहाँ गुण , धर्म या क्रिया के आधार पर उपमेय की तुलना उपमान से की जाती है  वहा उपमा  अलंकार होता है .
उदहारण-सागर-सा गंभीर हृदय हो,गिरी- सा ऊँचा हो जिसका मन।
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रूपक अलंकार 

जिस जगह उपमेय पर उपमान का आरोप किया जाए, उस अलंकार को रूपक अलंकार कहा जाता है, यानी उपमेय और उपमान में कोई अन्तर न दिखाई पड़े.
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 अतिशयोक्ति अलंकार यहाँ पर गुंजन की माला उपमेय में दावानल की ज्वाल उपमान के संभावना होने से उत्प्रेक्षा अलंकार है। जिस स्थान पर लोक-सीमा का अतिक्रमण करके किसी विषय का वर्णन होता है। वहाँ पर अतिशयोक्ति अलंकार होता है।

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