Skip to main content

Featured post

विज्ञान के महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर -1 Important Question Of Science

कुछ महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपकरण 1

अक्यूमुलेटर

इस उपकरण के द्वारा विद्युत ऊर्जा का संग्रह किया जाता है, इस विद्युत को आवश्यकता पड़ने पर काम में लिया जाता है .

एयरोमीटर

इस उपकरण का प्रयोग वायु एवं गैस का भार तथा घनत्व ज्ञात करने में होता है .

अल्टीमीटर 

इसका उपयोग उड़ते हुए विमान की  ऊंचाई नापने के लिए किया जाता है .

एममीटर 

इसका उपयोग विद्युत धारा को मापने के लिए किया जाता है .

एनीमोमीटर 

यह उपकरण हवा की शक्ति तथा गति को मापता है .

ऑडियोमीटर 

इस उपकरण ध्वनि की तीव्रता मापने के काम आता है .

ऑडियोफोन 

इसका उपयोग लोग सुनने में सहायता के लिए कान में लगाने के लिए करते हैं.

बैलिस्टिक गैल्वेनोमीटर 

इसका उपयोग लघु धारा को नापने में  करते हैं .

बैरोग्राफ 

इसके द्वारा वायुमंडल के दाब में होने वाले परिवर्तन को मापा जाता है.

बैरोमीटर 

यह उपकरण वायुदाब मापने के काम में आता है .

बाइनोक्यूलर 

यह उपकरण दूर की वस्तुएं देखने के काम में आता है.

कैलीपर्स 

इसके द्वारा बेलनाकार वस्तुओं के अंदर तथा बाहर के व्यास मापे जाते हैं तथा इससे वस्तु की मोटाई मापी जाती है .

कैलोरी मीटर 

यह उपकरण तांबे का बना होता है और ऊष्मा की मात्रा ज्ञात करने के काम में आता है.

कार्बोरेटर 

इस उपकरण का उपयोग अंत: दहन पेट्रोल इंजन में होता है यह यंत्र से पेट्रोल तथा हवा का मिश्रण बनाया जाता है .

कार्डिओ ग्राम 

इसके द्वारा ह्रदय गति की जांच की जाती है इसको इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम भी कहते हैं .

क्रोनोमीटर 

यह उपकरण जलयानों पर लगा होता है इससे सही समय का पता लगता है .

सिनेमाटोग्राफी 

इस उपकरण को छोटी-छोटी फिल्म को बड़ा करके पर्दे पर लगाकर लगातार क्रम में प्रक्षेपण के लिए प्रयोग किया जाता है.

कंपास बॉक्स 

इस उपकरण के द्वारा किसी स्थान पर उत्तर दक्षिण दिशा का ज्ञान होता है.

कंप्यूटर 

यह एक प्रकार की गणितीय यांत्रिक व्यवस्था है इसका उपयोग गणितीय समस्याओं को हल करने में होता है.

साइक्लोट्रान 

इस उपकरण की सहायता से आवेशित कणों जैसे नाभिक कण ,प्रोटान ,इलेक्ट्रॉन आदि को त्वरित किया जाता है.

डेंसिटीमीटर 

इस उपकरण का प्रयोग घनत्व ज्ञात करने में किया जाता है

डिक्टाफोन

इसका उपयोग अपनी बात तथा आदेश दूसरे व्यक्ति को सुनाने के लिए रिकॉर्ड किया जाता है यह प्रायः ऑफिसों में प्रयोग किया जाता है .

डायनेमो मीटर 

इस यंत्र का प्रयोग इंजन द्वारा उत्पन्न की गई शक्ति को मापने में होता है .

एपीडास्कोप 

इसका प्रयोग चित्रों को पर्दे पर प्रक्षेपण के लिए किया जाता है.

Comments

loading...

Popular posts from this blog

कुछ प्रमुख उपाधियाँ एवं प्राप्तकर्ता

उपाधि,प्राप्तकर्ता एवं दाता उपाधि प्राप्तकर्ता दाता गुरुदेव महात्मा नेताजी सरदार   देशरत्न   /अजातसत्रु कायदे आजम देशनायक विवेकानंद राष्ट्रपिता राजा अर्ध नंगा फ़क़ीर       रविन्द्रनाथ टैगोर महात्मा गाँधी सुभाष चन्द्र बोस   बल्लभ भाई पटेल डॉ.राजेन्द्र प्रसाद मोहम्मद अली जिन्ना सुभास चन्द्र बोस स्वामी विवेकानंद महात्मा गाँधी राजा राममोहन राय महात्मा गाँधी महात्मा गाँधी रविंद्रनाथ टैगोर एडोल्फ हिटलर वारदोली की महिलाओ महात्मा गाँधी महात्मा गाँधी रविन्द्र नाथ टैगोर महाराजा खेतड़ी सुभाष चन्द्र बोस अकबर द्वितीय विंस्टन चर्चिल

संधि एवं संधि के भेद

संधि दो ध्वनियों (वर्णों) के परस्पर मेल को सन्धि कहते हैं। अर्थात् जब दो शब्द मिलते हैं तो प्रथम शब्द की अन्तिम ध्वनि (वर्ण)तथा मिलने वाले शब्द की प्रथम ध्वनि के मेल से जो विकार होता है उसे स न्धि कहते हैं। संधि के प्रकार 1) स्वर संधि 2) व्यंजन संधि 3) विसर्ग संधि  स्वर संधि  - स्वर के साथ स्वर के मेल को स्वर संधि कहते हैं . जैसे - विद्या + अर्थी = विद्यार्थी , सूर्य + उदय = सूर्योदय , मुनि + इंद्र = मुनीन्द्र , कवि + ईश्वर = कवीश्वर , महा + ईश = महेश . स्वर संधि के भेद स्वर संधि के पाँच भेद हैं :- 1. दीर्घ संधि 2. गुण संधि 3. वृद्धि स्वर संधि  4. यण स्वर संधि 5. अयादी स्वर संधि   .दीर्घ संधि–  जब दो समान स्वर या सवर्ण मिल जाते हैँ, चाहे वे ह्रस्व होँ या दीर्घ, या एक ह्रस्व हो और दूसरा दीर्घ, तो उनके स्थान पर एक दीर्घ स्वर हो जाता है, इसी को सवर्ण दीर्घ स्वर संधि कहते हैँ। जैसे– अ/आ+अ/आ = आ दैत्य+अरि = दैत्यारि राम+अवतार = रामावतार देह+अंत = देहांत धर्म+आत्मा = धर्मात्मा परम+आत्मा = परमात्मा कदा+अपि = कदापि आत्मा+ आनंद = आत्मानंद जन्म...

रस एवं रस के प्रकार

रस का शाब्दिक अर्थ है 'आनन्द'। काव्य को पढ़ने या सुनने से जिस अलौकिक आनन्द की अनुभूति होती है, उसे 'रस' कहा जाता है। रस से जिस भाव की अनुभूति होती है वह रस का स्थायी भाव होता है।   रस के अवयव रस के चार अवयव या अंग हैं:-  1)स्थायी भाव 2)विभाव 3)अनुभाव 4)संचारी भाव स्थायी भाव- स्थायी भाव का मतलब है प्रधान भाव। प्रधान भाव वही हो सकता है जो रस की अवस्था तक पहुँचता है। काव्य या नाटक में एक स्थायी भाव शुरू से आख़िरी तक होता है।  स्थायी भावों की संख्या 9 मानी गई है। स्थायी भाव ही रस का आधार है। एक रस के मूल में एक स्थायी भाव रहता है। अतएव रसों की संख्या भी 9 हैं, जिन्हें नवरस कहा जाता है। मूलत: नवरस ही माने जाते हैं। बाद के आचार्यों ने 2 और भावों वात्सल्य और भगवद विषयक रति को स्थायी भाव की मान्यता दी है। इस प्रकार स्थायी भावों की संख्या 11 तक पहुँच जाती है विभाव विभाव वजह या कारण या प्रेरणा होता है| उसे इसीलिए विभाव कहते हैं क्योंकि यह वचन शरीर, इशारों और मानसिक भावनाओं का विवरण करते हैं | विभाव दो प्रकार का होता हे । 1)आलंबन विभाव या मौलिक निर्धारक ...